Laylatul Qadr

🌙 लैलतुल कद्र की दुआ और अमल

लैलतुल कद्र, जिसे शबे कद्र या तक़दीर की रात भी कहा जाता है, पूरे साल की सबसे बरकत वाली रात है। सिर्फ इस एक रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर है। अल्लाह तआला ने पवित्र कुरआन में फरमाया: "बेशक हमने इसे (कुरआन को) कद्र की रात में उतारा। और तुम्हें क्या मालूम कि कद्र की रात क्या है? कद्र की रात हजार महीनों से बेहतर है।" (सूरह अल-कद्र: 1-3) इस रात दुआ कबूल होती है, गुनाह माफ होते हैं और तक़दीर लिखी जाती है। इसी वजह से रसूलुल्लाह ﷺ रमज़ान के आखिरी 10 दिनों में एतिकाफ करते थे और पूरी रात इबादत और दुआ में गुजारते थे। आयशा (रज़ि.) से रिवायत है: "जब रमज़ान के आखिरी दस दिन शुरू होते, तो नबी ﷺ कमर कस लेते (पूरी तरह इबादत में लग जाते), सारी रात जागते और अपने घर वालों को भी जगाते।" (सहीह बुखारी: 2024) इस पेज पर आपको लैलतुल कद्र में पढ़ी जाने वाली सबसे बेहतरीन दुआ, कुरआन और सुन्नत की सबसे अहम दुआएं, और दुआ कबूल होने का सबसे अच्छा समय — सब कुछ एक जगह मिलेगा।

शबे कद्र की खास दुआ

रसूलुल्लाह ﷺ ने खुद यह दुआ शबे कद्र की रात में पढ़ने के लिए सिखाई थी। यह शबे कद्र की सबसे अहम और मशहूर दुआ है।

आयशा (रज़ि.) ने कहा: मैंने रसूलुल्लाह ﷺ से पूछा —

"या रसूलल्लाह! अगर मुझे पता चल जाए कि कौन सी रात लैलतुल कद्र है, तो उस रात मैं क्या पढ़ूं?"
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया — तुम यह कहो:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन, तुहिब्बुल अफ्वा, फ़ा'फ़ु अन्नी।

ऐ अल्लाह! बेशक आप बहुत माफ करने वाले हैं, माफी को पसंद करते हैं, इसलिए मुझे माफ कर दीजिए।

सुनन अत-तिर्मिज़ी: 3513, सुनन इब्न माजह: 3850

यह दुआ छोटी है, लेकिन बहुत ताकतवर है। इसमें अल्लाह का नाम "अफुव्व" आया है। अफुव्व का मतलब है — वह जो सिर्फ माफ नहीं करता, बल्कि गुनाह के निशान को भी पूरी तरह मिटा देता है

अल्लाह के नाम "गफूर" का मतलब है कि वह गुनाह को ढक देता है। लेकिन "अफुव्व" का मतलब है कि वह गुनाह को ऐसे मिटा देता है — जैसे वह हुआ ही नहीं।

इसलिए शबे कद्र की रात इस दुआ को बार-बार पढ़ें। नमाज़ में, सजदे में, तशह्हुद में, नमाज़ के बाद — हर समय इस दुआ को पढ़ते रहें।

🤲 लैलतुल कद्र में बार-बार पढ़ने वाली दुआएं

शबे कद्र की रात नीचे दी गई दुआओं को बार-बार पढ़ें। ये कुरआन और हदीस की सबसे अहम दुआओं में से हैं।

दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

रब्बना आतिना फ़िद-दुनिया हसनतन व फ़िल आखिरति हसनतन व क़िना अज़ाबन-नार।

ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे और हमें जहन्नम की सज़ा से बचा।

सूरह अल-बक़रह: 201

📝 यह रसूलुल्लाह ﷺ की सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली दुआ थी। अनस (रज़ि.) ने कहा कि नबी ﷺ सबसे ज़्यादा यही दुआ पढ़ते थे। (सहीह बुखारी: 4522)

जहन्नम से निजात की दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ رِضَاكَ وَالجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ سَخَطِكَ وَالنَّارِ

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका रिदाका वल-जन्नह, व आऊज़ु बिका मिन सख़तिका वन-नार।

ऐ अल्लाह! मैं आपसे आपकी रज़ामंदी और जन्नत मांगता हूं, और आपके गुस्से और आग से आपकी पनाह चाहता हूं।

सुनन अबू दाऊद: 792

📝 शबे कद्र में यह दुआ बहुत अहम है। क्योंकि इस रात जहन्नम से आज़ादी दी जाती है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: 'रमज़ान की हर रात अल्लाह बंदों को जहन्नम से आज़ाद करता है।' (सुनन अत-तिर्मिज़ी: 682)

सैय्यिदुल इस्तिगफार — माफी मांगने की सबसे बेहतरीन दुआ

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ

अल्लाहुम्मा अंता रब्बी, ला इलाहा इल्ला अंता, ख़लक़्तनी व अना अब्दुका, व अना अला अह्दिका व वअदिका मास्ततअतु, आऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअतु, अबूउ लका बिनिअमतिका अलय्या, व अबूउ बिज़म्बी, फग़फिर ली, फ़इन्नहू ला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अंता।

ऐ अल्लाह! आप मेरे रब हैं। आपके सिवा कोई माबूद नहीं। आपने मुझे पैदा किया और मैं आपका बंदा हूं। मैं अपनी पूरी कोशिश के साथ आपके अहद और वादे पर हूं। मैं अपने किए के बुरे नतीजे से आपकी पनाह चाहता हूं। मैं अपनी ऊपर आपकी नेमतों का इक़रार करता हूं और अपने गुनाह का भी इक़रार करता हूं। इसलिए मुझे माफ कर दीजिए। क्योंकि आपके सिवा कोई गुनाह माफ नहीं कर सकता।

सहीह बुखारी: 6306

📝 रसूलुल्लाह ﷺ ने इसे 'सैय्यिदुल इस्तिगफार' यानी माफी मांगने की सबसे बेहतरीन दुआ कहा। जो इसे सुबह यकीन के साथ पढ़े और उसी दिन उसकी मौत हो जाए, वह जन्नत में जाएगा।

दुआ यूनुस — मुसीबत से छुटकारे की दुआ

لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ

ला इलाहा इल्ला अंता सुभानका इन्नी कुंतु मिनज़-ज़ालिमीन।

आपके सिवा कोई माबूद नहीं। आप पाक हैं। बेशक मैं ज़ालिमों में से था।

सूरह अल-अंबिया: 87

📝 यह यूनुस (अ.स.) की दुआ है — जब वह मछली के पेट में थे। अल्लाह ने फरमाया कि कोई मुसलमान किसी भी मामले में यह दुआ करे, तो अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर कबूल करता है। (सुनन अत-तिर्मिज़ी: 3505)

हिदायत और ईमान पर मजबूती की दुआ

رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ

रब्बना ला तुज़िग़ क़ुलूबना बअदा इज़ हदैतना व हब लना मिल्लदुनका रह्मह, इन्नका अंतल-वह्हाब।

ऐ हमारे रब! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, और अपनी तरफ से हमें रहमत दे। बेशक तू ही बड़ा देने वाला है।

सूरह आले इमरान: 8

📝 यह बहुत अहम दुआ है। क्योंकि हिदायत पर बने रहना अल्लाह की सबसे बड़ी नेमतों में से है। शबे कद्र में इस दुआ के साथ ईमान पर मजबूती मांगें।

फिक्र और दुख से बचाव की दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ وَقَهْرِ الرِّجَالِ

अल्लाहुम्मा इन्नी आऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़न, व आऊज़ु बिका मिनल अज्ज़ि वल कसल, व आऊज़ु बिका मिनल जुब्नि वल बुख्ल, व आऊज़ु बिका मिन ग़लबतिद-दैनि व क़हरिर-रिजाल।

ऐ अल्लाह! मैं आपकी पनाह चाहता हूं फिक्र और ग़म से, बेबसी और सुस्ती से, बुज़दिली और कंजूसी से, और कर्ज़ के बोझ और लोगों के दबाव से।

सहीह बुखारी: 6369

📝 रसूलुल्लाह ﷺ यह दुआ नियमित तौर पर पढ़ते थे। जिंदगी के हर तरह के दुख, दबाव और परेशानी की बात इस एक दुआ में आ गई है।

📖 कुरआन की दुआएं जो लैलतुल कद्र में पढ़ी जा सकती हैं

पवित्र कुरआन में अल्लाह तआला ने बहुत सुंदर दुआएं सिखाई हैं। नबी और रसूलों ने ये दुआएं पढ़ी हैं। अगर शबे कद्र की रात इन कुरआनी दुआओं को पढ़ा जाए, तो इंशाअल्लाह अल्लाह इन्हें कबूल करेंगे।

मां-बाप के लिए दुआ

رَّبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًا

रब्बिर हम्हुमा कमा रब्बयानी सगीरा।

ऐ मेरे रब! मेरे मां-बाप पर रहम फरमा, जैसे उन्होंने मुझे बचपन में पाला-पोसा।

सूरह अल-इसरा: 24

📝 लैलतुल कद्र में अपने मां-बाप के लिए यह दुआ करें — चाहे वे ज़िंदा हों या उनका इंतिकाल हो चुका हो।

इब्राहीम (अ.स.) की दुआ — नमाज़ क़ायम रखने के लिए

رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ

रब्बिज अल्नी मुक़ीमस सलाति व मिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तक़ब्बल दु'आ।

ऐ मेरे रब! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना और मेरी औलाद में से भी। ऐ हमारे रब! मेरी दुआ कबूल फरमा।

सूरह इब्राहीम: 40

📝 अपने और अपनी औलाद की नमाज़ के लिए यह बहुत अहम दुआ है। शबे कद्र में अपने घरवालों की हिदायत के लिए यह दुआ करें।

मूसा (अ.स.) की दुआ — मुश्किल काम में मदद के लिए

رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي

रब्बिश रह्ली सद्री, व यस्सिर ली अम्री, वहलुल उक़्दतं मिल लिसानी, यफ़्क़हू क़ौली।

ऐ मेरे रब! मेरा सीना खोल दे, मेरा काम आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे ताकि लोग मेरी बात समझ सकें।

सूरह ताहा: 25-28

📝 पढ़ाई, नौकरी, कारोबार या जिंदगी के किसी भी मुश्किल काम से पहले यह दुआ पढ़ें। शबे कद्र में यह दुआ करने से अल्लाह इंशाअल्लाह रास्ता आसान कर देंगे।

अय्यूब (अ.स.) की दुआ — बीमारी और तकलीफ में अल्लाह की तरफ लौटना

أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ

अन्नी मस्सनियद-दुर्रु व अंता अरहमुर-राहिमीन।

मुझे तकलीफ पहुंची है, और आप सबसे ज़्यादा रहम करने वाले हैं।

सूरह अल-अंबिया: 83

📝 अय्यूब (अ.स.) लंबे समय तक सख्त बीमारी में रहे। यह दुआ करने के बाद अल्लाह ने उन्हें शिफा दी। बीमारी या किसी भी तकलीफ में यह दुआ पढ़ें।

सब्र और जीत की दुआ

رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

रब्बना अफ़रिग़ अलैना सब्रं व सब्बित अक़दामना वन्सुरना अलल क़ौमिल काफिरीन।

ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे, हमारे कदम जमा दे और काफिर लोगों के खिलाफ हमारी मदद कर।

सूरह अल-बक़रह: 250

📝 जिंदगी के मुश्किल वक्त में सब्र रखना अल्लाह की खास नेमत है। शबे कद्र में अल्लाह से सब्र और मजबूती मांगें।

इल्म बढ़ने की दुआ

رَبِّ زِدْنِي عِلْمًا

रब्बि ज़िद्नी इल्मा।

ऐ मेरे रब! मेरा इल्म बढ़ा दे।

सूरह ताहा: 114

📝 यह वही एक चीज़ है जिसके बारे में अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को ज्यादा मांगने का हुक्म दिया। इससे इल्म की अहमियत साफ होती है।

🙏 माफी की दुआएं – लैलतुल कद्र में इस्तिगफार

शबे कद्र की रात माफी पाने का सबसे अच्छा मौका है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: 'जो शख्स ईमान के साथ और सवाब की उम्मीद में लैलतुल कद्र में खड़ा रहे (इबादत करे), उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।' (सहीह बुखारी: 1901)

इस्तिगफार की छोटी दुआ

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَىُّ الْقَيُّومُ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ

अस्तग़फिरुल्लाहल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल कय्यूमु व अतूबु इलैहि।

मैं अल्लाह से माफी मांगता हूं — जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है और सबको संभालने वाला है — और मैं उसी की तरफ तौबा करता हूं।

सुनन अबू दाऊद: 1517

📝 रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया, जो शख्स यह दुआ पढ़े, अल्लाह उसके गुनाह माफ कर देते हैं, चाहे वह जंग के मैदान से भागा हो।

नबी ﷺ का नियमित इस्तिगफार

رَبِّ اغْفِرْ لِي وَتُبْ عَلَيَّ إِنَّكَ أَنْتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ

रब्बिग़फिर ली व तुब अलय्या इन्नका अंतत-तव्वाबुर-रहीम।

ऐ मेरे रब! मुझे माफ कर और मेरी तौबा कबूल कर। बेशक तू तौबा कबूल करने वाला, बहुत रहम वाला है।

सुनन अबू दाऊद: 1516

📝 इब्न उमर (रज़ि.) ने कहा कि रसूलुल्लाह ﷺ एक ही मजलिस में यह दुआ 100 बार तक पढ़ते थे।

आदम (अ.स.) की माफी की दुआ

رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ

रब्बना ज़लमना अनफुसना व इल्लम तग़फिर लना व तरहमना लनकूनन्ना मिनल-खासिरीन।

ऐ हमारे रब! हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया। अगर तू हमें माफ न करे और हम पर रहम न करे, तो हम ज़रूर घाटा उठाने वालों में हो जाएंगे।

सूरह अल-आराफ: 23

आम इस्तिगफार

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ

अस्तग़फिरुल्लाहा व अतूबु इलैहि।

मैं अल्लाह से माफी मांगता हूं और उसी की तरफ तौबा करता हूं।

सहीह बुखारी: 6307

📝 रसूलुल्लाह ﷺ हर दिन 70 बार से ज्यादा यह इस्तिगफार पढ़ते थे। शबे कद्र में जितना हो सके उतना यह इस्तिगफार पढ़ें।

🕐 लैलतुल कद्र में दुआ का सबसे अच्छा समय

शबे कद्र की पूरी रात दुआ के लिए बहुत अच्छी है। लेकिन कुछ समय ऐसे हैं जब दुआ कबूल होने की उम्मीद और ज्यादा होती है।

  • रात के आखिरी हिस्से में तहज्जुद के समय
    रात का आखिरी एक तिहाई हिस्सा दुआ का सबसे अच्छा समय है। अल्लाह तआला हर रात सबसे निचले आसमान पर आते हैं और फरमाते हैं:
    "कौन है जो मुझे पुकारे ताकि मैं उसकी पुकार का जवाब दूं? कौन है जो मुझसे मांगे ताकि मैं उसे दूं? कौन है जो मुझसे माफी मांगे ताकि मैं उसे माफ कर दूं?" (सहीह बुखारी: 1145)
    शबे कद्र की रात यह समय और भी खास होता है। इसलिए रात के आखिरी हिस्से में उठें, तहज्जुद पढ़ें और दुआ करें।
  • सजदे में दुआ करें
    सजदा वह समय है जब बंदा अपने रब के सबसे करीब होता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
    "बंदा अपने रब के सबसे ज्यादा करीब उस समय होता है जब वह सजदे में होता है। इसलिए सजदे में ज्यादा दुआ करो।" (सहीह मुस्लिम: 482)
    शबे कद्र में नमाज़ के सजदे में लंबा समय देकर दुआ करें।
  • अज़ान और इक़ामत के बीच
    मग़रिब और इशा की अज़ान के बाद और इक़ामत से पहले दुआ करें। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
    "अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ लौटाई नहीं जाती।" (सुनन अबू दाऊद: 521)
  • इफ्तार के समय (रमज़ान में)
    रोज़ेदार की इफ्तार के समय की दुआ कबूल होती है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
    "तीन दुआएं ठुकराई नहीं जातीं: रोज़ेदार की इफ्तार के वक्त की दुआ, इंसाफ करने वाले हाकिम की दुआ और मजलूम की दुआ।" (सुनन अत-तिर्मिज़ी: 3598)
  • नमाज़ के बाद दुआ करें
    फर्ज नमाज़ के बाद दुआ करना बहुत अच्छा है। क्योंकि आप अभी-अभी अल्लाह से बात करके आए हैं — अब मांगेंगे तो वह इंशाअल्लाह देगा। शबे कद्र में इशा और तहज्जुद के बाद दुआ में ज्यादा समय दें।
  • बारिश के समय दुआ करें
    रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
    "दो वक्त ऐसे हैं जब दुआ लौटाई नहीं जाती: अज़ान के वक्त और बारिश के वक्त।" (मुस्तद्रक अल-हाकिम: 2534)
    अगर शबे कद्र में बारिश हो, तो यह और भी खास समय है — इस वक्त ज्यादा दुआ करें।

लैलतुल कद्र की दुआ के बारे में आम सवाल-जवाब

लैलतुल कद्र में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली दुआ है: "अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन, तुहिब्बुल अफ्वा, फ़ा'फ़ु अन्नी" — ऐ अल्लाह! आप माफ करने वाले हैं, माफी को पसंद करते हैं, इसलिए मुझे माफ कर दें। यह दुआ रसूलुल्लाह ﷺ ने खुद सिखाई है। (तिर्मिज़ी: 3513)

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