Laylatul Qadr

लैलतुल कद्र हदीस - शब-ए-कद्र (बरकत वाली रात)

लैलतुल कद्र, जिसे शब-ए-कद्र भी कहा जाता है, इस्लाम की सबसे बरकत और अजमत वाली रात है। इसी रात कुरान मजीद पहली बार नाजिल हुआ था, और अल्लाह तआला ने इस रात को हजार महीनों से बेहतर करार दिया है। इस पेज पर हमने लैलतुल कद्र के बारे में तमाम सहीह हदीसों को टॉपिक के हिसाब से तरतीब दिया है। यहाँ आपको शब-ए-कद्र की फजीलत, इस रात की निशानियां, बेहतरीन आमाल, और कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए — यह सब सहीह हदीस की रोशनी में मिलेगा। हर हदीस को उसकी असली अरबी इबारत, हिंदी तर्जुमे और सही हवाले के साथ पेश किया गया है।

🌟 लैलतुल कद्र की फजीलत के बारे में हदीसें

लैलतुल कद्र की फजीलत और सवाब बेहिसाब है। इस एक रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से बढ़कर है। पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बहुत सी हदीसों में इस रात की अहमियत बयान फरमाई है।

हदीस 1रावी: अबू हुरैरा (रज़ि.)

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنْ قَامَ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ»

अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से लैलतुल कद्र में नमाज़ के लिए खड़ा होगा, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाएंगे।"

सहीह बुखारी: 1901, सहीह मुस्लिम: 760
हदीस 2रावी: अनस बिन मालिक (रज़ि.)

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ: دَخَلَ رَمَضَانُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ هَذَا الشَّهْرَ قَدْ حَضَرَكُمْ، وَفِيهِ لَيْلَةٌ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ، مَنْ حُرِمَهَا فَقَدْ حُرِمَ الْخَيْرَ كُلَّهُ، وَلَا يُحْرَمُ خَيْرَهَا إِلَّا مَحْرُومٌ»

अनस बिन मालिक (रज़ि.) बयान करते हैं: जब रमज़ान आया तो रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "यह महीना तुम्हारे पास आ गया है। इसमें एक ऐसी रात है जो हजार महीनों से बेहतर है। जो इस रात की भलाई से महरूम रहा, वह सारी भलाई से महरूम रहा। और इसकी भलाई से सिर्फ वही महरूम होता है जो वाक़ई बदनसीब हो।"

सुनन इब्ने माजा: 1644
हदीस 3रावी: अबू हुरैरा (रज़ि.)

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنْ صَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ، وَمَنْ قَامَ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ»

अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से रमज़ान के रोज़े रखेगा, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे। और जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से लैलतुल कद्र में नमाज़ पढ़ेगा, उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाएंगे।"

सहीह बुखारी: 2014

💡 अहम सबक

लैलतुल कद्र को पाना जिंदगी की सबसे बड़ी नेमत है। शब-ए-कद्र की सिर्फ एक रात की इबादत 83 साल और 4 महीने की इबादत के बराबर है! जो इस रात से महरूम रहा, वह वाक़ई सारी भलाई से महरूम रहा।

📅 लैलतुल कद्र कब है और इसकी निशानियां क्या हैं?

लैलतुल कद्र रमज़ान की आखिरी 10 रातों में आती है, खास तौर पर ताक़ रातों में — 21, 23, 25, 27 और 29 की रात। लेकिन अल्लाह तआला ने इसकी सही तारीख को छिपा कर रखा है ताकि मोमिन रमज़ान के आखिरी दस दिनों में लगातार इबादत में लगे रहें।

हदीस 1रावी: आयशा (रज़ि.)

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «تَحَرَّوْا لَيْلَةَ الْقَدْرِ فِي الْوِتْرِ مِنَ الْعَشْرِ الْأَوَاخِرِ مِنْ رَمَضَانَ»

आयशा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "लैलतुल कद्र को रमज़ान के आखिरी दस दिनों की ताक़ रातों में तलाश करो।"

सहीह बुखारी: 2017
हदीस 2रावी: उबै बिन काब (रज़ि.)

عَنْ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ قَالَ: وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْلَمُ أَيُّ لَيْلَةٍ هِيَ، هِيَ اللَّيْلَةُ الَّتِي أَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقِيَامِهَا، هِيَ لَيْلَةُ صَبِيحَةِ سَبْعٍ وَعِشْرِينَ

उबै बिन काब (रज़ि.) ने कहा: "अल्लाह की कसम! मुझे मालूम है वह कौन सी रात है। वह वही रात है जिसमें रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें नमाज़ पढ़ने का हुक्म दिया। वह 27वीं रात है।"

सहीह मुस्लिम: 762
हदीस 3रावी: इब्ने उमर (रज़ि.)

عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّ رِجَالًا مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُرُوا لَيْلَةَ الْقَدْرِ فِي الْمَنَامِ فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَرَى رُؤْيَاكُمْ قَدْ تَوَاطَأَتْ فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ، فَمَنْ كَانَ مُتَحَرِّيهَا فَلْيَتَحَرَّهَا فِي السَّبْعِ الْأَوَاخِرِ»

इब्ने उमर (रज़ि.) बयान करते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कुछ सहाबा ने ख्वाब में देखा कि लैलतुल कद्र रमज़ान की आखिरी सात रातों में है। तो रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "मैं देख रहा हूँ कि तुम सबके ख्वाब आखिरी सात रातों की तरफ इशारा कर रहे हैं। तो जो इसे तलाश करना चाहे, वह आखिरी सात रातों में तलाश करे।"

सहीह बुखारी: 2015

💡 ज़रूरी बात

हालांकि 27 रमज़ान की रात को बहुत से लोग लैलतुल कद्र मानते हैं, लेकिन कोई एक रात यकीनी तौर पर साबित नहीं है। इसलिए सबसे बेहतर — और यही सुन्नत है — कि रमज़ान की आखिरी दस रातों में पूरी तरह इबादत और नमाज़ में लगे रहें।

🔍 शब-ए-कद्र की निशानियां (लैलतुल कद्र को कैसे पहचानें)

🌡️

नॉर्मल और सुकून वाला मौसम

इस रात न ज़्यादा गर्मी होती है और न ज़्यादा सर्दी। रात बहुत ही नर्म, पुरसुकून और शांति से भरी होती है।

🌅

अगली सुबह हल्का सूरज निकलना

अगली सुबह सूरज तेज़ किरणों के बिना निकलता है — धीमा और फीका नज़र आता है, रोज़ जैसी चमक नहीं होती।

🌙

चांद की खास शक्ल

चांद एक प्लेट के टुकड़े की तरह नज़र आता है — पूरा गोल नहीं होता।

🌧️

हल्की बारिश का इमकान

इस रात हल्की बारिश भी हो सकती है।

🕌 शब-ए-कद्र के आमाल के बारे में हदीसें

पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने शब-ए-कद्र में क्या आमाल करने हैं इसकी वाज़ेह रहनुमाई फरमाई है। यह बरकत वाली रात नमाज़, दुआ, कुरान की तिलावत और अल्लाह से माफी मांगने में गुज़ारनी चाहिए।

हदीस 1रावी: आयशा (रज़ि.)

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْعَشْرُ شَدَّ مِئْزَرَهُ، وَأَحْيَا لَيْلَهُ، وَأَيْقَظَ أَهْلَهُ

आयशा (रज़ि.) फरमाती हैं: "जब रमज़ान के आखिरी दस दिन आते तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कमर कस लेते (यानी पूरी तरह इबादत में लग जाते), सारी रात जाग कर इबादत करते, और अपने घर वालों को भी इबादत के लिए जगाते।"

सहीह बुखारी: 2024
हदीस 2रावी: आयशा (रज़ि.)

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَعْتَكِفُ الْعَشْرَ الْأَوَاخِرَ مِنْ رَمَضَانَ، حَتَّى تَوَفَّاهُ اللَّهُ، ثُمَّ اعْتَكَفَ أَزْوَاجُهُ مِنْ بَعْدِهِ

आयशा (रज़ि.) बयान करती हैं: "रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रमज़ान के आखिरी दस दिनों में ऐतकाफ (मस्जिद में इबादत के लिए ठहरना) किया करते थे, और अल्लाह के आपको वफात देने तक यह अमल जारी रखा। आपके बाद आपकी बीवियों ने भी ऐतकाफ किया।"

सहीह बुखारी: 2026, सहीह मुस्लिम: 1172
हदीस 3रावी: अबू हुरैरा (रज़ि.)

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنْ قَامَ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ»

अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से लैलतुल कद्र में नमाज़ के लिए खड़ा होगा, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाएंगे।"

सहीह बुखारी: 1901

शब-ए-कद्र के बेहतरीन आमाल (इस रात में क्या-क्या करें)

1.

तहाज्जुद और नफ्ल नमाज़ – रात के आखिरी हिस्से में नमाज़ पढ़ना सबसे ज़्यादा सवाब वाला है।

2.

कुरान की तिलावत – कुरान को समझ कर और गौर-ओ-फिक्र के साथ पढ़ने की कोशिश करें।

3.

दुआ और मुनाजात – खास तौर पर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सिखाई हुई माफी की दुआ खूब पढ़ें।

4.

इस्तिगफार (माफी मांगना) – जितना हो सके 'अस्तगफिरुल्लाह' पढ़ें।

5.

दरूद शरीफ – नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कसरत से दरूद भेजें।

6.

सदका और खैरात – इस रात सदका देना हज़ार महीनों के सदका देने के बराबर है।

7.

ज़िक्र (अल्लाह को याद करना) – सुभान अल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहू अकबर पढ़ें।

8.

ऐतकाफ – मस्जिद में ठहर कर पूरी तरह इबादत में लग जाएं।

🤲 शब-ए-कद्र की दुआ (लैलतुल कद्र की सबसे अहम दुआ)

पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने लैलतुल कद्र के लिए एक खास दुआ सिखाई है। यह इस बरकत वाली रात की सबसे अहम दुआ है और हर मुसलमान को चाहिए कि इसे याद करे और बार-बार पढ़े।

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

अल्लाहुम्मा इन्नाका 'अफ़ुव्वुन, तुहिब्बुल 'अफ़वा, फ़ा'फ़ु 'अन्नी

ऐ अल्लाह, तू बहुत माफ करने वाला है। तू माफ करना पसंद करता है। पस मुझे माफ कर दे।

हदीसरावी: आयशा (रज़ि.)

عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، أَرَأَيْتَ إِنْ عَلِمْتُ أَيُّ لَيْلَةٍ لَيْلَةُ الْقَدْرِ، مَا أَقُولُ فِيهَا؟ قَالَ: «قُولِي: اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي»

आयशा (रज़ि.) फरमाती हैं: "मैंने पूछा, 'या रसूलल्लाह, अगर मुझे मालूम हो जाए कि कौन सी रात लैलतुल कद्र है तो उस रात क्या कहूँ?' आपने फरमाया: 'कहो — اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي'"

सुनन तिर्मिज़ी: 3513, सुनन इब्ने माजा: 3850 (सहीह)

🌟 यह दुआ इतनी ताक़तवर क्यों है?

इस दुआ में अल्लाह के खूबसूरत नामों में से एक नाम इस्तेमाल हुआ है — 'अल-अफ़ूव' (العفو), जिसका मतलब है बहुत माफ करने वाला। 'अफ़्व' का मतलब सिर्फ माफ करना नहीं — बल्कि गुनाह को पूरी तरह मिटा देना है। जब अल्लाह 'अफ़्व' फरमाता है तो गुनाह माफ करता है, उसका रिकॉर्ड मिटा देता है, और कयामत के दिन उस गुनाह से शर्मिंदा नहीं करेगा। शब-ए-कद्र की रात यह दुआ जितनी बार हो सके पढ़ें। यह छोटी है, याद करना आसान है, लेकिन इसका मतलब बहुत गहरा है।

📖 लैलतुल कद्र के बारे में कुरान की आयतें

अल्लाह तआला ने कुरान में लैलतुल कद्र के बारे में एक पूरी सूरत नाज़िल फरमाई है — सूरह अल-कद्र। इस रात का ज़िक्र सूरह अद-दुखान में भी है। ये आयतें शब-ए-कद्र की अज़मत और बरकतों को बयान करती हैं।

सूरह अल-कद्र

सूरह नंबर 97

إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ ۝

बेशक हमने इसे (कुरान को) शब-ए-कद्र में नाज़िल किया।

وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ ۝

और तुम्हें क्या मालूम कि शब-ए-कद्र क्या है?

لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ ۝

शब-ए-कद्र हज़ार महीनों से बेहतर है।

تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ ۝

इस रात फरिश्ते और रूह (जिब्रईल) अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं।

سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ ۝

यह रात पूरी सलामती है — फजर (सुबह) होने तक।

सूरह अद-दुखान

44:3-4

إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ ۝

बेशक हमने इसे (कुरान को) एक बरकत वाली रात में नाज़िल किया। बेशक हम खबरदार करने वाले हैं।

فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ ۝

इस रात हर हिकमत वाले मामले का फैसला किया जाता है।

📝 इन आयतों से सबक

  • इस बरकत वाली रात में कुरान मजीद सबसे पहले नाज़िल हुआ।
  • इस एक रात की इबादत 83 साल से ज़्यादा (हज़ार महीने) की इबादत के बराबर है।
  • इस रात बहुत बड़ी तादाद में फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं।
  • आने वाले साल के तमाम अहम फैसले और तकदीरें इसी रात तय की जाती हैं।
  • फजर (सुबह) तक पूरी रात सलामती और बरकतों से भरी होती है।

शब-ए-कद्र के बारे में आम सवाल

लैलतुल कद्र रमज़ान के आखिरी दस दिनों की ताक़ रातों में तलाश करनी चाहिए — 21, 23, 25, 27 और 29 की रात। सहीह हदीस के मुताबिक 27वीं रात की सबसे ज़्यादा उम्मीद है, लेकिन कोई तारीख फिक्स नहीं है। 2026 में रमज़ान के आखिरी दस दिन मार्च में आने की उम्मीद है (चांद देखने पर निर्भर)।
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