French Polynesia में शब-ए-कद्र 2026 कब है?

French Polynesia में शब-ए-कद्र (लैलतुल कद्र) 2026, रमज़ान 2026 के आखिरी 10 दिनों की ताक रातों (विषम रातों) में होने की उम्मीद है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, French Polynesia में चांद दिखने के हिसाब से रमज़ान 2026 की शुरुआत लगभग 9 फ़रवरी 2026 से हो सकती है।

French Polynesia में रमज़ान की आखिरी 10 रातें 28 फ़रवरी – 9 मार्च, 2026 के बीच आ सकती हैं। French Polynesia के मुसलमानों को शब-ए-कद्र को रमज़ान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात में तलाश करना चाहिए।

बहुत से उलेमा का मानना है कि 27वीं शब (6 मार्च) के शब-ए-कद्र होने का सबसे ज़्यादा इमकान (संभावना) है। हालांकि, प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ ने मुसलमानों को आखिरी 10 दिनों की सभी ताक रातों में इस बरकत वाली रात को तलाश करने की ताकीद की है।

लैलतुल क़द्र कब है?

28 फ़र॰

21

रमज़ान

2 मार्च

23

रमज़ान

4 मार्च

25

रमज़ान

6 मार्च

27

रमज़ान

8 मार्च

29

रमज़ान

Laylatul Qadr

शब-ए-कद्र क्या है? – इस्लाम में सबसे मुकद्दस रात

शब-ए-कद्र, जिसे लैलतुल कद्र भी कहा जाता है, इस्लाम की सबसे मुकद्दस (पवित्र) रात है। यह वही रात है जब अल्लाह ने ग़ार-ए-हिरा (हिरा गुफा) में हज़रत जिब्रील (A.S.) के ज़रिए नबी करीम ﷺ पर क़ुरआन मजीद की पहली आयतें नाज़िल की थीं।

लफ्ज़ "लैलतुल कद्र" अरबी भाषा से है। "लैलत" का मतलब है रात, और "कद्र" का मतलब है ताकत, अज़मत या तकदीर। इसलिए लैलतुल कद्र का मतलब है "अज़मत वाली रात" या "तकदीर की रात"

अल्लाह तआला क़ुरआन में इस बरकत वाली रात के बारे में फ़रमाता है:

"बेशक हमने इसे (क़ुरआन को) शब-ए-कद्र में नाज़िल किया। और तुम क्या जानो कि शब-ए-कद्र क्या है? शब-ए-कद्र हज़ार महीनों से बेहतर है।" (सूरह अल-कद्र: 1-3)

इसका मतलब है कि शब-ए-कद्र में अल्लाह की इबादत करना 1,000 महीनों की इबादत से बेहतर है — जो कि 83 साल से भी ज़्यादा की लगातार इबादत के बराबर है! इस रात में पढ़ी गई हर नमाज़, क़ुरआन की हर तिलावत, और हर दुआ का सवाब सोच से भी परे है।

इस रात में अल्लाह तआला आने वाले साल के लिए पूरी कायनात की तकदीर का फैसला भी करता है। फरिश्ते, जिनमें हज़रत जिब्रील (A.S.) भी शामिल हैं, अल्लाह की रहमत और बरकतों के साथ ज़मीन पर उतरते हैं। अल्लाह फ़रमाता है:

"इसमें फरिश्ते और रूह (जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं। यह रात फज्र के तुलू (उदय) होने तक पूरी तरह सलामती है।" (सूरह अल-कद्र: 4-5)

यही वजह है कि शब-ए-कद्र को तकदीर की रात कहा जाता है — क्योंकि इसी रात अल्लाह तआला तय करता है कि अगले साल किस इंसान के साथ क्या होने वाला है।

शब-ए-कद्र की निशानियां – इस रात को कैसे पहचानें?

शब-ए-कद्र की पक्की तारीख कोई नहीं जानता। अल्लाह ने इसे छुपा कर रखा है। लेकिन नबी करीम ﷺ ने हमें कुछ ऐसी निशानियां बताई हैं जो इस मुकद्दस रात या इसके बाद वाली सुबह में नज़र आती हैं।
  • रात बहुत सुकून भरी और ठंडी-गरम से पाक होती है
    शब-ए-कद्र की सबसे बड़ी निशानी यह है कि यह रात बहुत सुकून वाली होती है। ना तो बहुत गर्मी होती है और ना ही बहुत सर्दी। मौसम बहुत सुहाना होता है। नबी ﷺ ने फ़रमाया:
    "लैलतुल कद्र एक सुकून भरी, साफ़ रात है। यह ना गरम है ना ठंडी। और अगली सुबह सूरज हल्का और सुर्खी माइल (हल्का लाल) निकलता है।" (सहीह इब्न खुज़ैमा: 2192)
  • अगली सुबह सूरज बिना तेज़ किरणों के निकलता है
    यह शब-ए-कद्र की सबसे मशहूर निशानी है। इस रात के बाद वाली सुबह सूरज की रोशनी मद्धम और हल्की होती है। उसमें चुभने वाली तेज़ किरणें नहीं होतीं। उबय्य इब्न काब (R.A.) ने फ़रमाया:
    "अल्लाह के रसूल ﷺ ने हमें जो निशानी बताई थी — उस सुबह सूरज बिना किसी नज़र आने वाली किरण के तुलू होता है।" (सहीह मुस्लिम: 762)
  • चांद आधे प्याले या प्लेट जैसा नज़र आता है
    शब-ए-कद्र की एक और निशानी चांद का आकार है। इस रात आसमान में चांद किसी प्लेट के आधे हिस्से जैसा दिखाई देता है। इब्न अब्बास (R.A.) से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया:
    "लैलतुल कद्र एक खुशनुमा रात है, ना गरम ना ठंडी, और उस रात चांद आधे प्याले की तरह लगता है।" (मुसनद अत-तयालिसी: 2802)
  • उस रात या उससे एक दिन पहले बारिश हो सकती है
    कभी-कभी शब-ए-कद्र में या उससे एक दिन पहले बारिश होती है। अबू सईद अल-खुदरी (R.A.) ने फ़रमाया कि एक बार नबी ﷺ ने रमज़ान की 21वीं रात की सुबह कीचड़ और पानी में सज्दा किया था। इससे पता चलता है कि शब-ए-कद्र में बारिश हुई थी। (सहीह अल-बुखारी: 2018)

शब-ए-कद्र की बेहतरीन दुआ

इस रात के लिए नबी ﷺ की बताई गई सबसे खास दुआ

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़ा'फ़ु अन्नी।

ऐ अल्लाह, बेशक तू माफ़ करने वाला है, और माफ़ी को पसंद करता है, इसलिए मुझे माफ़ कर दे।

सुनन अत-तिर्मिज़ी: 3513

मफ़िरत (क्षमा) के लिए शब-ए-कद्र की दुआ

رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ

रब्बना ज़लम्ना अन्फुसना वा-इल्लम तग़फ़िर लना वतरहमना लनकुनन्ना मिनल ख़ासिरीन।

ऐ हमारे रब, हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया है, और अगर तूने हमें माफ़ नहीं किया और हम पर रहम नहीं किया, तो यकीनन हम नुकसान उठाने वालों में से हो जाएंगे।

सूरह अल-आराफ़: 23

दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव-वफ़िल आख़िरति हसनतंव-वकिना अज़ाबन नार।

ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम की आग के अज़ाब से बचा ले।

क़ुरआन 2:201

जहन्नम की आग से पनाह मांगने की दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ رِضَاكَ وَالجَنَّةَ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ سَخَطِكَ وَالنَّارِ

अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका रिज़ाक वल जन्नत, वा अऊज़ुबिका मिन सख़तिक वन्नार।

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरी रज़ा और जन्नत का सवाल करता हूं, और तेरी नाराज़गी और जहन्नम की आग से तेरी पनाह मांगता हूं।

सुनन अबू दाऊद: 792

सूरह लैलतुल कद्र: इन्ना अन्ज़लनाहु फ़ी लैलतिल कद्र

إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ

बेशक हमने इसे (क़ुरआन को) शब-ए-कद्र में नाज़िल किया।

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ

और तुम क्या जानो कि शब-ए-कद्र क्या है?

لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ

शब-ए-कद्र हज़ार महीनों से बेहतर है।

تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ

इसमें फरिश्ते और रूह (जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं।

سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ

यह रात फज्र के तुलू (उदय) होने तक पूरी तरह सलामती है।

यह सूरह हमें शब-ए-कद्र के बारे में चार कमाल की बातें बताती है: इस रात क़ुरआन नाज़िल हुआ, यह रात 1,000 महीनों (यानी 83 साल से ज़्यादा की इबादत!) से बेहतर है, फरिश्ते और हज़रत जिब्रील (A.S.) अल्लाह की इजाज़त से उतरते हैं, और फज्र तक इस रात में मुकम्मल सुकून और सलामती होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

French Polynesia में शब-ए-कद्र रमज़ान के आखिरी 10 दिनों की ताक रातों में से किसी एक रात होती है — 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं, या 29वीं। 27वीं रात के शब-ए-कद्र होने के चांस सबसे ज़्यादा होते हैं।

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